शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020
शनिवार, 17 अक्टूबर 2020
जो तुम आ -जाते एक बार (part-2)
जो तुम आ -जाते एक बार (part-2)
जो तुम आ -जाते एक बार
धुल जाते सारे राग-ताप।
जो तुम आ -जाते एक बार।
ऐसी चुप्पी क्यों साथ -साथ ,
जिसमें सन्नाटों की बास।
जो देते जख्मों पर आघात ,
जो तुम आ -जाते एक बार।
सुन लेती तुम जो मेरी बात ,
सन्नाटों में होते धुन हजार।
नजरें कर देती शिक़वे बयान।
रिमझिम झींसे- स्नेहिल तार,
भेदे मिटते सारे संताप।
छंट जाते बादल पृथक तार।
हो जाते मन भी खुशगवार।
जो तुम आ -जाते एक बार।
बोझिल मन भी हो शांत -शांत ,
बाहर मौसम भी खुश मिज़ाज।
सोने का सूरज साथ -साथ,
रोशन करता ये गुलिस्तां।
जो तुम आ -जाते एक बार।
संपने बुनती मैं बार -बार ,
कर आँखों से बातें हजार।
जो तुम आ जाते एक बार।
धड़कन भी करती सौ बात ,
हर आहट नजरें झाँक-झाँक।
जो तुम आ -जाते एक बार।
मधुरम बेला करते तलाश ,
संग ख्वाबों में भी बांध शमाँ ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
खुद से करती बातें हज़ार।
पल -पल करती मैं इंतजार ,
जो तुम आ -जाते एक बार।
संवेगों की ये तीक्ष्ण चाप ,
कर देती मुझको हैरान।
जो तुम आ -जाते एक बार।
यांदो की विस्मृत ये उड़ान ,
गूँथी मंजरियों संग याद,
जो तुम आ -जाते एक बार।
भावों के मंजर साथ -साथ,
पलते रिश्ते की हर शाख।
जो तुम आ -जाते एक बार।
बदले -बदले से हर तार ,
मुद्रा भी करती नृत्य -नाद।
जो तुम आ -जाते एक बार।
भावों के भाव -थपेड़ों में ,
पल -पल गुजरे जो साथ -साथ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
जीवन शिक़वे के भी हज़ार ,
कर लेते मिल दो -चार -हाथ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
जीवन के इतने रंग -तले ,
हम भी बन जाते चित्रकार।
जो तुम आ -जाते एक बार।
हर रंगों की अपनी है छाप,
ले -लेते ठप्पे साथ -साथ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
मधुरम काया ले साथ -साथ,
घुल -मिलकर रहते साथ -साथ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
जीवन के इन चलचित्र तले,
दुःख में भी रहते साथ -साथ।
जो तुम आ -जाते एक बार।
सूई-धागे बन साथ -साथ,
गूँथते रिश्ते के हर तार,
जो तुम आ जाते एक बार।
-अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the illustrations. Image from efficacy.org
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020
जो तुम आ जाते एक बार (part-1)
जो तुम आ जाते एक बार (part-1)
जो तुम आ जाते एक बार ,
बातें कर लेती मैं हजार।
जो तुम आ जाती एक बार।
गीले -शिक़वे सब भूल -भाल ,
हो जाते हम -तुम साथ -साथ ,
जो तुम आ -जाते एक बार।
मुग्धा करते ये तेरे भाल ,
अविरल अश्रु से भीग -भाग।
जो तुम आ -जाती एक बार।
तेरे अंतस्थल छेंद बाण,
कर देती शिक़वे चूर -चूर ,
उमड़े नयनों में प्रलय-प्रवाह।
जो तुम आ जाते एक बार।
अंतस्तल के संवेग -तले ,
फिसलते शिक़वे साथ -साथ ,
कुछ तुम कहते -कुछ हम कहते ,
मिटते सन्नाटों के तार,
जो तुम आ -जाते एक बार।
पल -पल तांडव के सुर -ताल ,
मन में करते अंतर्नाद।
जो तुम आ -जाती एक बार।
हो जाते हम भी एक साथ ,
जो तुम आ -जाते एक बार।
उमड़ते सारे भाव -प्रलाप ,
भीगे नयनों से कर के वार,
हिंचकोले खाते अश्रु -तार ,
नथुनों संग करते आघात ,
जो तुम आ -जाते एक बार।
करते गातों से युद्ध -वार ,
ज्वाला बन भी करते आघात।
जो तुम-आ -जाते एक बार।
ह्र्दय-भेदे जब अश्रु -तार ,
मिट जाते सारे हृदय-ताप।
जो तुम आ -जाते एक बार।
सुन लेते मेरी तुम जो बात ,
हर लेते मेरे हृदय -ताप।
खोल जो देते हृदय -द्वार ,
हो जाते हम भी पास -पास।
जो तुम आ जाते एक बार।
- अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the images. The illustration was taken from pngio.com
**the poem was inspired by one of the greatest works of Mahadevi Verma, "Jo Tum Aa Jaate Ek Baa"
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020
निद्रा
निद्रा
बंद आँखों में संजती सदा,
खुली आँखों में वास तेरा।
पलकें खोलूं तो सबेरा ,
बंद आँखे गहन अँधेरा।
ये अँधेरी रात तलाशती तुझको ,
तेरे आने की दस्तक बताती मुझको।
घुमड़ -सिहरन की चोट सी ,
उमड़ती आँखों में विश्राम तू।
तेरे आने से श्रांत होती धड़कन ,
नस -नस बिखेरती सिहरन।
तेरे छूने से मन विश्राम करता मेरा ,
दिलो -धड़कन भी आराम करता मेरा।
तेरे होने से चार्ज होता हर पल ,
तेरा आना विश्राम देता तत्क्षण।
हलचल तेरा तरोताजा करता मुझको ,
नई सुबह ला जगाता मुझको।
स्फूर्ति सुनहरी रश्मियों को बिखेरकर,
नव जोश भर राह पर चलाता मुझको।
पथ चुन आगे बढ़ाता मुझको,
कशिश को कोशिश भी बनाती तू ही।
मुस्कान भर मंजिल तक पहुँचाती तू है।
तेरा होना यूँ जरूरी सा लगता मुझको ,
जिंदगी में श्वासों का होना जैसे।।
- अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the illustration. The image was added from society6
शनिवार, 10 अक्टूबर 2020
मित्रता
मित्रता
मित्रता एक भाव है,
संबंधो का शिलान्यास है।
उम्मीदों की आस है,
भीनी -एहसास है।
रिमझिम -बरसात है ,
तपन की प्यास है।
उम्मीदों की आस है,
बेफिक्र भी ख्वाब है।
रिश्ते की जान है ,
उमंगो की उड़ान है।
अनजाना पहचान है,
रिश्ते की शाख है।
पत्तों की झिलमिल छांव है।
गुत्थी सुलझाने की ,
मुश्किलें भगाने की,
जख्मो को भरने की,
सोच को बदलने की,
पथ को परखने की ,
संकल्प को लेने की ,
लक्ष्य को छूने की।
सपने जगाने की ,
राह की तपिश में ,
चंदन विखेरने की।
सपने बुनने की ,
मंजिल को लेने की।
बस !
जरूरत है तुमको,
मित्र को परखने की।।
अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
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शनिवार, 12 सितंबर 2020
बचपन
बचपन
वे फुरसत के दिन व बचपन की यादें,
बहुत याद आती है काग़ज की नावेँ।
वे रिमझिम सी बुँदे हथेली में लेना,
वो वायु के झोंको को महसूस करना।
यूँ बारिश की बूँदो से खुद को भिगोना,
वो मिट्टी के खुशबू में खुद खो जाना।
वो चिड़िया की चूँ-चूँ में खुद डूब जाना ,
यूँ तितली की रंगत से विस्मित हो जाना।
न कल की फ़िक्र न चुभन कशिश की,
बस बढ़ते कदम थे न राहें सीमित थीं।
न टीवी की हलचल न गाड़ी की भगदड़,
जहाँ भी देखो वहीं मनोरंजन।
वह दादी की बक -बक व तानों के सुर में,
बसते थे सारे शालाओं के सिलेबस।
यूँ जीवन के सिलेबस सिखाती थी दादी ,
नियमों का पालन करती थी दादी।
न कोई किताबें न कोई पढ़ाई,
यूँ जीवन के सिलबस कराती थी दादी।
जीवन के हर पल थे शिक्षण के साधन,
निर्णय परीक्षा व अनुभव ही दीक्षा।
अनुभूति का अनुभव ही जीवन के ग्रेड,
संस्कारों के बंधन से संजते संदेश।
अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the illustrations.
पड़ाव उम्र का
पड़ाव उम्र का
देखो तुम आज बहुत सुंदर हो,
तुम्हारा रूप सलोना मुझे भाता है।
उभरती माथे की लकीरें,
बतातीं तेरा चिंतन।
तेरे परिपक्व लब्ज़ जो चटक पड़ गए ,
तेरे शब्दों की गहराई नापती।
तेरे मुस्कान की उभरतीं लकीरें भी ,
बयाँ करती सुख की सच्चाई सारी।
आँखों के नीचे ये जो काले धब्बे हैं ,
बयाँ करती ये नजरों की पहुंच भारी।
यूँ नाक को सिकोड़ झल्लाना तेरा,
यूँ शेर का दहाड़ सब पर भारी।
यूँ श्याह होठ व उभरतीं झुर्रियों की लकीरें,
बयाँ करती संबेदना सारी।
देखो तुम सुंदर बहुत हो ,
दिखने दो ये संगमी केश अपने।
बयाँ करने दो बदलाव अपने।
जो सफ़ेद हैं सहजता बयाँ करते हैं ,
जो काले हैं इन्हे रंगों में भीगने दो।
उम्र तो पड़ाव से गुजरता है ,
गुजरने दो, उभरने दो-मचलने को।
न रोको,न टोको ,बढ़ने दो,
बढ़ने दो इन्हे बढ़ने दो,
स्वयंम से संवरने दो।
मोहित हो महकने दो ,
मोदित हो मचलने दो।
उम्र के लकीरों को ,
खुले दिल से आने दो
संज के संवरने दो
खुद को समझने दो।।
-अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the illustrations
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