निद्रा
बंद आँखों में संजती सदा,
खुली आँखों में वास तेरा।
पलकें खोलूं तो सबेरा ,
बंद आँखे गहन अँधेरा।
ये अँधेरी रात तलाशती तुझको ,
तेरे आने की दस्तक बताती मुझको।
घुमड़ -सिहरन की चोट सी ,
उमड़ती आँखों में विश्राम तू।
तेरे आने से श्रांत होती धड़कन ,
नस -नस बिखेरती सिहरन।
तेरे छूने से मन विश्राम करता मेरा ,
दिलो -धड़कन भी आराम करता मेरा।
तेरे होने से चार्ज होता हर पल ,
तेरा आना विश्राम देता तत्क्षण।
हलचल तेरा तरोताजा करता मुझको ,
नई सुबह ला जगाता मुझको।
स्फूर्ति सुनहरी रश्मियों को बिखेरकर,
नव जोश भर राह पर चलाता मुझको।
पथ चुन आगे बढ़ाता मुझको,
कशिश को कोशिश भी बनाती तू ही।
मुस्कान भर मंजिल तक पहुँचाती तू है।
तेरा होना यूँ जरूरी सा लगता मुझको ,
जिंदगी में श्वासों का होना जैसे।।
- अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the illustration. The image was added from society6

Gr88
जवाब देंहटाएंThanks 😊😊😊😊
हटाएंWOW
जवाब देंहटाएंThanks 😊
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