संबंध
मैंने सोचा कुछ काव्य लिखूं, संबंधों पर कुछ वाक्य लिखूं।
पड़तीं नजरें इन पन्नों पर, अभिलाषित हो यूँ मुखर उठीं।
संबंध तो मेरा है तुझसे, हर -पल मैं तेरे पास रहूं।
चाहे खुशियाँ हो या गम हों, भावों से भरकर प्यार करूँ।
हर शब्दों में, हर बोल मे मैं ही।
मुखरित हो, भव जाल बुनूँ।
सोचा न कभी मैंने तुझको, किस रिश्ते से तुमको जोड़ूँ।
तूँ पास है मेरे हर -पल यूँ, सांसो की डोर से बँध के तूँ।
तू खिलती रह , मदमस्तक हो।
तेरी उड़ती ,इन भावों में।
तेरी उड़ती इन भावों में, मैं भी डुंबू इठलाती रहूं।
नतमस्तक हो, इन ख़्वाब तले।
तेरे-मीठे इस रिश्ते को ,महकाती पल्लव -आँचल सी।
लो पकड़ कलम की स्याही से ,पुलकित स्वर में संबंध लिखूं।
तूँ साँस है मेरी ,मैं जीवन हूँ।
रिमझिम बारिश की बूँदे तूँ।
तू अरुण है मेरी ,मैं अनिमा।
यूँ ख़्वाब सजे , मन मोहित हो।
सारे संबंध को नाम तो दे दूँ ,पर तुझको मैं नाम न दूँ।
समय -प्रवाह में बहते -गिरते ,टूटे -फूटे सारे रिश्ते।
पर तुझसे मेरा रिश्ता ,यूँ सागर के लहरों का उठना।
जितना ढूढूँ उतना मिलता ,न जाने कितने रत्न जड़े।
विभूषित काया-सी साथ चलूँ ,तेरे अरमान लिए हर -पल।
पल -पल प्रमुदित स्नेहिल बूँदे,तेरा -मेरा श्रृंगार करे।
भावों के भाव थपेड़े बन ,पल -पल पन्नो पर ख़्वाब पले।।
-अनुपमा उपाध्याय त्रिपाठी
*we do not own the images





