सद्भावना है पता मेरा, भाव ही हृदय है। विचारों की गलियों में , गूंजता ए स्वर है। प्रेम ही निवास मेरा , मित्रता ही नियति मेरी। जीवन ही राग मेरा , स्नेह ही उड़ान मेरी। संवेदना की अनुभूति , मानवता ही धर्म मेरा। स्नेह -सद्भावना के आँचल -तले , पलता -पोषता ए चरित्र है। कुदरत तेरी -काया के , रूप यूँ अनेक है।।
Woww so good
जवाब देंहटाएंThanks 😊🤩
हटाएंWah.. bahut sundar.. bachhon k liye bahut upyogi h..
जवाब देंहटाएं😊Thanks
हटाएंTOO GOOD!!
जवाब देंहटाएं😊 THANKS
हटाएंBohot khoob likha hai
जवाब देंहटाएं🙏Thanks
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